रुचिका की महाभारत में चीर हरण के आधूनिक तमाशाई
सीबीआई के पूर्व ज्वाइंट डॉयरेक्टर आरएम सिहं ने बताया कि रुचिका मामले की जांच के दौरान आरोपी डीजीपी राठौड़ ने अपने प्रभाव के बल पर उनको जांच से ही हटवा दिया था। अगर सीबीआई के पूर्व ज्वांइट डॉयरेक्टर की माने तो राठौड़ की सीबीआई में खूब चलती थी। बावजूद इसके कि राठौड़ खुद आरोपी थे,जिसके खिलाफ जांच भी सीबीआई कर रही थी, और उनकी यानि एक आरोपी की देश की सबसे बड़ी जांच ऐजेसी सीबीआई मे चलती थी। बक़ौल आरएम सिहं राठौड़ बाक़ायदा उस वक़्त के डॉयरेक्टर से मिले और मुझे यानि जांच अधिकारी को ही हटवा दिया। आरएम सिहं के इस बयान या रहस्योदघाटन से एक बार फिर उन आरोपों को बल मिल गया है कि कई बार सीबीआई निष्पक्ष नहीं रहती। साथ ही उसमे आरोपी के साथ अक्सर साठगांठ के आरोप भी मज़बूत हो रहे है। लेकिन यहां सबसे अहम और ख़ास बात ये है कि सीबीआई के उच्चाधिकारी के खिलाफ एक आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके जांच को न सिर्फ प्रभावित कर लेता है, बल्कि वो उस जांच अधिकारी को हटवा भी देता है। और जांच अधिकारी पूरे उन्नीस साल तक खामोश रहता है। न तो वो अदालत को ये बताता है कि आरोपी राठौड़ दोषी भी है, और रुचिका के साथ ज़्यादती हो रही है। अगर रुचिका के दोषी राठौड़ हैं तो वो लोग भी हैं जो समय रहते अपनी आवाज़ या सच्चाई को उठा नहीं सके। जब तक रुचिका कमज़ोर थी, तब सब खामोश थे, जब पीड़ित ने लड़ते लड़ते मायूस होकर खुदकशी कर ली, और पीड़ित का परिवार बर्बाद हो गया तब भी किसी की आवाज़ नहीं खुली। सीबीआई के पूर्व ज्वाइंट डॉयरेक्टर आरएम सिंह अगर इस बीच ये राज़ खोलते तो शायद उनकी छवि इतनी संजदेहास्पद न होती।आखिर में अदालत ने इंसाफ को ज़िदा रखते हुए जब राठौड़ को दोषी करार दे दिया तो सब पाला बदल कर रुचिका के हमदर्द बन रहे हैं। यानि द्रोपदी के चीर हरण के लिए जितना दोषी दुर्योधन है उससे कहीं ज़्यादा भीष्म पितामह की वो ख़ामोशी है, जो सत्ताधारी दल और ताक़तवर के खिलाफ मुंह न खोल कर उन्होने रखी थी।
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Tuesday, December 29, 2009
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इस नए ब्लॉग के साथ नए वर्ष में हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .. अच्छा लिखते हैं आप .. आपके और आपके परिवार वालों के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!
ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें
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